थक कर शाम जहा हो जाए वही सवेरा होता हैं
दीवानों का कहाँ एक जगह रैन बसेरा होता हैं
मन फैले तो चाँद सितारे अपनी बाहों में भर ले
यदि सिमटे तो घर आँगन में भी तेरा मेरा होता हैं
गीली आंखों के पीछे का दुःख देखो तो पता चले
कोहरा क्यों तालाबो पर इतना घना होता हैं
सूरज डूब गया या निकल गया मुझे क्या करना
मेरे शहर में तेरे बिना अँधेरा ही होता हैं
लाख सम्हालो दिल के पागलखाने को
पर दिल जिसका होता हो उसी का होता हैं
दिल और रूह का रिश्ता कहे क्या होता हैं
माँ से लिपट कर कोई बच्चा रोते रोते सोता हैं
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