नही मिलता अब वो मुझे बीती यादो में
बदल ही गया हैं वो बस चाँद मुलाकातों में
हसरत रही उसे देखने की पास आने की
कोई वजह नही नज़र आती मुझे उसके दूर जाने की
कभी मेरी किताब में उल्टे सीधे चित्र बनता था
आज मेरे बनाये चित्रों को देखता तक नही
कभी मेरे आने पर बारिश में भीगने जाने का प्रोग्राम बनाता था
पर अब बारिश आने पर वो मिलता तक नही
कभी घंटो बैठ मुझे चिठ्ठिया लिखता था
ख़त में हर बात होती थी
यहाँ ये हुआ उसने वो कहा पापा ऐसे डांटते हैं तुम कब आओगे
कभी घंटो बैठ मुझे चिठ्ठिया लिखता था
पर अब मेरी लिखी चिठ्ठिया वो कमबख्त खोलता तक नही
पर जानता हूँ करता हैं वो सब जानकर
मिल सकते नही जिंदगी में हमेशा के लिए
बस इसीलिए बदलना चाहता हैं वो ख़ुद को सबके लिए
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